शंकर की सीरत

पिछली बार की तरह इस बार भी होली और ईद मिलादुन नबी साथ ही पड़ रहे हैं तकरीबन पूरा हिंदुस्तान रंगों और मिठाइयों की चाशनी में डूबा रहेगा हज़रात मोहम्मद (सल्) की सीरत पर तकरीरें और नात ख्वानी का सिलसिला आम होगा मस्जिदों में सजदे और मजारों में उर्स की भरमार होगी गुलाल और गुजिया के भोग से तबियत भर जायेगी लेकिन अबकी होली जब रंग उठाना, तो सोचना उन बच्चो के बारें में , जो स्टेशन पर रहते हैं, प्लास्टिक की खाली बोतलों के भरोसे जो शायद दिन भर भूके रहेगें क्योंकि उस दिन सारी ट्रेने खाली ही चलेंगी, बोतलों के बिना कुछ तो परिवार के साथ त्यौहार मनाने कि ख़ुशी की वजह से और कुछ गोबर और कीचड वाली देसी होली के कारण और अबकी बार जब सीरते रसूल को सुनना तो सोचना उस आठ साल के, एक हाथ वाले शंकर के बारे में जो पूछने पर कहता हैं " भय्या पच्चीस रुपए काफी हैं , दस दस मेरे और दानिश के लिए और पांच हमारे कुत्ते के लिए"



यूनुस

पिछले साल मेरे द्वारा शूट किया गया विडियो यहाँ देखें
http://www.youtube.com/watch?v=Og5ouusK7ow

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